"मामा जी ने शासकीय कर्मचारियों को मामू बनाया"

      साथियो आपने दो कहावतें सुनीं होगीं एक तो यह कि "घर में नहीं चार दाने,मामा जी चले भुनाने"अर्थात घर में खाने को नहीं  और मामा जी चबेना भुनाने की बातें कर रहे हैं,"लम्बी लम्बी फेंक रहे हैं""लम्बी चौड़ी हांक रहे हैं "ये भी कहावतें हैं दूसरी "मामा जी ने सबको मामू बनाया"मतलब जनता को मूर्ख बनाया देखिए मामा जी शासकीय कर्मचारियों को वेतन वृद्धि नहीं दे पाए,जो मात्र डेढ़ दो हजार रुपए बनती है डी.ए.नहीं दे पाए जो मात्र एक या डेढ़ हजार रुपए बनता है, और घोषणा कर दी कि दीपावली से पहले त्यौहार अग्रिम के रूप में दस हजार रुपए दिए जाएंगे,देना किसे है सिर्फ घोषणा ही तो करनी है जमीनी हकीकत यह है कि अक्टूबर यानी पिछले महीने का वेतन अधिकांश शासकीय कर्मचारियों को नहीं मिला है हमारे कर्मचारी संघ के नेताओं को रेवड़ी डाल दी गई होगी कौन आवाज उठाए ?दीपावली के मात्र दो दिन बचे हैं,डर के मारे शासकीय कर्मचारी मन मसोस कर बैठे हैं।जागो शासकीय कर्मचारियों जागो अपने हक़ को मांगो। निवेदक-"पत्थर फ़र्रूख़ाबादी"